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Friday, March 8, 2019
Discussion of Boss
Friday, March 1, 2019
An Unsatisfied Boss
Wednesday, February 27, 2019
The Ant and Grasshopper
Monday, February 25, 2019
बॉस की सांत्वना
चीटी और टिड्डा दोनो ही नाराज़ थे। प्रोमोशन के नाम पर मिला धोखा बर्दाश्त नही कर पा रहे थे। उनका गुस्सा अपने इमीडियेट बॉस कॉकरोच पर फट पड़ा।
कॉकरोच ने पूरी कोशिश की चीटी और टिड्डे को समझाने की पर दोनों ने ही बगावती तेवर अपना लिये थे। कॉकरोच ने अपने बॉस छिपकली को यह संदेश दिया। छिपकली ने सख्त रुख अपनाया और कहा कि यह मैनेजमेंट का फैसला है। मगर चीटी और टिड्डा ने यह फैसला मानने से इनकार कर दिया।
छिपकली को भी समझ आ गया कि मामला बिगड़ गया है। उसने अपने बॉस गिरगिट को यह जानकारी दी। गिरगिट ने मामले की गंभीरता को समझा और छिपकली को मीटिंग बुलाने के लिए कहा गया। छिपकली ने यह संदेश कॉकरोच को दिया।
मीटिंग मे गिरगिट ने पहला सवाल पूछा, "किसे दिक्कत है?"
टिड्डा कुछ बोलने के लिए खड़ा हुआ पर उसके बोलने से पहले ही सुपर बॉस गिरगिट बोला, ' अगर दिक्कत है तो इस्तीफा दो और जहा प्रोमोशन मिले वहाँ नौकरी कर लो।"
टिड्डे की बोलती बंद हो गयी। चीटी ने भी सोचा की रु. 30000 महीने की तो ईएमआई ही जाती है अगर नौकरी गयी तो खाने के लाले पड़ जाएंगे।
और इस तरह, हर तरह के विरोध ने उस मीटिंग मे दम तोड़ दिया।
MORAL OF THE STORY: बॉस का हर कदम सही ही होता है और अगर नही भी होता हो तो मान लेना चाहिए कि सही है। क्योंकि अगर एक महीने तनख्वाह नही आई तो ईएमआई कैसे जाएगी।
Monday, February 18, 2019
चीटी और टिड्डा
चींटी हमेशा बॉस के दिये टास्क को जी जान से पूरा करने में जुट जाती जबकि टिड्डा हमेशा दिये हुए टास्क को दाये बाये कर देता।चीटी टिड्डे को समझाती तो टिड्डा चीटी की मजाक बना देता। ऐसे समय में तिलचट्टा भी टिड्डे की हां में हॉ मिलाता।
बॉस टिड्डे से नाखुश था और चीटी की तारीफ करता। चीटी को हमेशा लगता कि अब की बार तो पक्का प्रमोशन मिलेगा।
अब की बार मीटिंग जब हुई तो बॉस ने टिड्डे को भी प्रमोशन का दावेदार बता दिया। चीटी बहुत दुखी थी उसने तो पुरानी कहानी सुनी थी जिसमे चीटी और टिड्डे में से मेहनती चीटी जीत गयी थी।
टिड्डे ने फिर चीटी को समझाया कि काम करने से ज्यादा जरूरी काम करते दिखना है। इतनी मेहनत से कुछ हासिल नही होगा।
पर चीटी अपनी मेहनत से पीछे नही हटी औऱ टिड्डा अपनी हरकतों से बाज़ नही आया और बॉस कभी चीटी को फेवर करता तो कभी टिड्डे को।
मामला कुल मिला कर टिड्डे के फेवर में बनता जा रहा था। चीटी दुखी थी इतनी मेहनत के बाद भी उसकी काबिलियत पर प्रश्नचिन्ह था जबकि टिड्डा कम काम करके भी उससे आगे था।
फिर प्रमोशन हुआ मगर टिड्डे का नही हुआ। तो फिर किसका हुआ?
आपको लग रहा होगा कि चीटी का हुआ? जी नही प्रमोशन गुबरेले का हुआ जो बॉस की पहली कंपनी में उसके साथ काम करता था।
Moral of the story: आप चाहे चीटी हो या टिड्डा। आप चाहै दिन रात काम करे या निखट्टू बन के मलाई खाये। प्रमोशन हमेशा उसका होता है जो बॉस का प्रिय हो।
Monday, December 3, 2018
बॉस का चुटकुला
शेर की मीटिंग चल रही थी. उसका सबऑर्डिनेट तेंदुआ, तेंदुए का सबऑर्डिनेट चीता, और फ्रंट लाइन मैनेजर्स जैसे लोमडी सियार भेड़िया।हाइना मीटिंग में उपस्थित थे.
शेर का पूरा ध्यान अपने स्टाफ को कॉरपोरेट एटिकेट्स सिखाने पर था. बीच बीच में शेर भाषण को बोर होने से बचाने के लिए एकाध चुटकुला उसमे जोड़ देता था.
सब हंसते थे पर लोमड़ी उस चुटकुले का मतलब नोट कर लेती थी. लोमडी का ध्यान पूरी तरह शेर के भाषण पर था.
शेर ने यह बात नोट की लोमडी चुप बैठी है और हंस नही रही. उसे लगा कि लोमडी सीरियसली मीटिंग अटेंड नही कर रही है.
शेर चुटकुला सुनाता हुआ लोमडी के पास आया और अचानक पूछा कि क्या आप मीटिंग में है?
तेंदुए और चीते ने गुर्रा कर लोमड़ी को देखा. लोमडी घबरा गयी. उसने जो कुछ भी नॉट किया था वो शेर को दिखा दिया.
शेर कुछ सोच कर बोला अगर आप मीटिंग में है तो हंस क्यो नही रही है?
उसके बाद लोमडी शेर के हर चुट्कुले पर ठहाका मार मार कर हंसी. उसे लगा कि शायद शेर को अब शिकायत नही होगी.
मीटिंग खत्म होने के बाद नाराज़ तेंदुए ने लोमडी और उसके बॉस चीते को तलब किया. तेंदुआ बहुत गुस्से में था. उसने चीते को वार्निंग दी कि लोमडी को तमीज़ सिखाये इस तरह मीटिंग में हंसा जाता है क्या?
Moral of the story:
बॉस के चुटकुले पर हंसो या मत हंसो बैंड हमेशा जूनियर की बजती है
Sunday, December 2, 2018
बॉस का डिसकशन
उसे चिंता थी कि अगले साल क्या टारगेट हो जो उसके एम्प्लॉइज की क्षमता के अनुकूल हो. उसने तुरंत एक डिस्कशन मीटिंग बुलाई. उसने अपने सबऑर्डिनेट तेंदुए और उसके सबऑर्डिनेट चीते को आदेश दिया गया कि पूरे साल का सेल्स डेटा और इन्वेस्टमेंट की डिटेल एक्सेल शीट पर तैयार करे और अपने सुझाव तैयार करे कि कैसे सेल बढ़ेगी और उसके हिसाब से टारगेट दिए जायेंगे.
तेंदुए ने चीते के साथ मिल कर 20 पॉइंट्स तैयार किये. तय समय पर तेंदुआ और चीता डिस्कशन के लिए पहुच गए. मीटिंग शुरू हुई. लंच तक शेर कंपनी के विज़न के बारे मैं बताता रहा. लंच के बाद शेर ने कंपनी के टारगेट के बारे में बताना शुरू किया. तेंदुआ और चीता अलर्ट हो कर डिस्कशन कर लिए तैयार थे यद्यपि लंच में।किये भोजन से उन्हें हल्की से नींद आ रही थी. टी टाइम तक शेर उन्हें टारगेट और रेवेन्यू जनरेशन के बारे में बताता रहा.
टी टाइम के बाद शेर ने उन्है हिंट देना शुरू किया कि पॉसिबल टारगेट इस साल के टारगेट का दुगना हो सकता है. तेंदुआ और चीता ने इसका विरोध किया और डिस्कशन के लिए तैयार किया गया डेटा दिखाने की कोशिश की. इस पर शेर भड़क गया और तेंदुए, चीते की घिग्घी बंध गयी.
आखिरकार शेर ने उन पर तरस खाते हुए टारगेट इस साल के टारगेट का डेढ़ गुना कर दिया और डिस्कशन मीटिंग खत्म हो गयी.
तेंदुए और चीते ने राहत की सांस ली कि आखिरकार वह टारगेट कम कराने में कामयाब रहे पर उन्हें चिंता थी कि वह डाउन द लाइन इसे कैसे बताए. बहुत सोच विचार कर उन्होंने एक डिस्कशन मीटिंग बुलाई. हर डाउन द लाइन एम्प्लाइज को मेल लिखी गयी कि अमुक तारीख को ठीक 10 बजे सेल्स डेटा और इन्वेस्टमेंट डिटेल के साथ निश्चित स्थान पर पहुचे क्योकि कुछ डिस्कशन होना है.
Moral of the story:
The power of timely action
The difference between success and failure is marginal. Sometimes, a person who is talented, efficient, confident, and equipped with knowled...
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