चीटी और टिड्डा दोनो ही नाराज़ थे। प्रोमोशन के नाम पर मिला धोखा बर्दाश्त नही कर पा रहे थे। उनका गुस्सा अपने इमीडियेट बॉस कॉकरोच पर फट पड़ा।
कॉकरोच ने पूरी कोशिश की चीटी और टिड्डे को समझाने की पर दोनों ने ही बगावती तेवर अपना लिये थे। कॉकरोच ने अपने बॉस छिपकली को यह संदेश दिया। छिपकली ने सख्त रुख अपनाया और कहा कि यह मैनेजमेंट का फैसला है। मगर चीटी और टिड्डा ने यह फैसला मानने से इनकार कर दिया।
छिपकली को भी समझ आ गया कि मामला बिगड़ गया है। उसने अपने बॉस गिरगिट को यह जानकारी दी। गिरगिट ने मामले की गंभीरता को समझा और छिपकली को मीटिंग बुलाने के लिए कहा गया। छिपकली ने यह संदेश कॉकरोच को दिया।
मीटिंग मे गिरगिट ने पहला सवाल पूछा, "किसे दिक्कत है?"
टिड्डा कुछ बोलने के लिए खड़ा हुआ पर उसके बोलने से पहले ही सुपर बॉस गिरगिट बोला, ' अगर दिक्कत है तो इस्तीफा दो और जहा प्रोमोशन मिले वहाँ नौकरी कर लो।"
टिड्डे की बोलती बंद हो गयी। चीटी ने भी सोचा की रु. 30000 महीने की तो ईएमआई ही जाती है अगर नौकरी गयी तो खाने के लाले पड़ जाएंगे।
और इस तरह, हर तरह के विरोध ने उस मीटिंग मे दम तोड़ दिया।
MORAL OF THE STORY: बॉस का हर कदम सही ही होता है और अगर नही भी होता हो तो मान लेना चाहिए कि सही है। क्योंकि अगर एक महीने तनख्वाह नही आई तो ईएमआई कैसे जाएगी।
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Monday, February 25, 2019
बॉस की सांत्वना
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