दिल्ली मैं आजकल नर्सरी एडमिशन की मारामारी चल रही है।बेचारे पेरेंट्स एक स्कूल से दूसरे स्कूल के चक्कर लगा रहे है।
हर स्कूल का एडमिशन का क्राइटेरिया अलग,पॉइंट सिस्टम अलग, डॉक्यूमेंट अलग। किसी स्कूल मैं 40 पॉइंट्स डिस्टेंस के है तो किसी मे डिस्टेंस के केवल दस पॉइंट्स ही है। द्वारका की तरफ के स्कूल मैं डिस्टेंस की जगह द्वारका और एक्स द्वारका के पॉइंट्स है। सिबलिंग और अलुमनाइ के पॉइंट्स लगभग हर जगह निर्णायक है। इससे पेरेंट्स के लिए दुविधा बहुत बढ़ गयी है। हर पेरेंट्स 20 से 30 स्कूल्ज मैं रजिस्टर कर रहे है। डाक्यूमेंट्स के मामले मैं भी यही पेंच है। किसी मैं पेरेंट्स की आईडी एड्रेस प्रूफ और बर्थ सर्टिफिकेट से ही काम चल रहा है तो कही पर मेडिकल फिटनेस, एफिडेविट भी चाहिए। कही पर डॉक्टर का फिटनेस सर्टिफिकेट चाहिए तो कही स्कूल के फॉर्मेट पर फिटनेस चाहिए। कही पर केवल बच्चे की फोटो ही पर्याप्त है तो कही पर पेरेंट्स की फोटो भी साथ चाहिए। रजिस्ट्रेशन फॉर्म्स के लिए नियम है की स्कूल केवल 25 रुपये वसूल सकते है और प्रॉस्पेक्टस नहीं बेच सकते है। ज्यादातर स्कूल इसका पालन कर रहे है मगर कुछ स्कूल खुलेआम प्रोस्पेक्टस बेच रहे है। और 125 से 250 तक वसूल रहे है। इसके अलावा रजिस्ट्रेशन फॉर्म्स के लिए टाइम भी अलग अलग है। कोई 7 बजे से 11 बजे तक फॉर्म दे रहा है। कोई 9 से 1.00बजे तक। कही 12.30 तक ही फॉर्म्स मिल रहे है। हर जगह अलग अलग समय। पहले कहा गया था की रजिस्ट्रेशन ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से होंगे मगर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन केवल कुछ ही स्कूल्ज मैं है। सरकार के तमाम दावों के बावजूद ज्यादार स्कूल्स ने अपने फीस के बारे मैं न तो जानकारी वेबसाइट पर डाली है ऩा ही स्कूल के बाहर प्रदर्शित की है। पूछने पर भी स्पष्ट जवाव के बदले गोलमोल उत्तर मिलते है। वैसे ज्यादार स्कूल्ज ने फीस 4000प्रतिमाह से ऊपर ही है। जो ट्रांसपोर्ट और अन्य खर्चो के साथ 5500 से 6000 प्रतिमाह तक जा रही है। जो दो बच्चो वाले मिडिल क्लास पेरेंट्स की दम निकालने के लिए पर्याप्त से भी ज्यादा है। इन सबके ऊपर एडमिशन के समय दी जाने वाली एकमुश्त राशी जो तमाम तरह के चार्ज के नाम पर ली जा रही है 13000 से 40000 हज़ार तक है। इसके अलावा वेतन आयोग की सिफारिशे भी अभिभावकों के दिल की धड़कन बडा रही है। यह भी अभिभावकों से ही फीस मैं १० से १५% वृद्धि के रूप मैं वसूलने की तैयारी की जा रही है. यानी कुल मिला कर अफरा तफरी सी है। अगर आप किसी स्कूल के बाहर जाए तो परेशानहाल अभिभावक आपको अपने दुःख बाटते मिल जायेंगे।सबसे ज्यादा समस्या उन दो बच्चो वाले अभिभावकों की है जिनके दूसरे बच्चे का किसी दूसरे स्कूल मैं नबर आने की उम्मीद है। क्योकि बड़ी क्लास मैं एडमिशन के तो कोई नियम ही नही है। पिचले पांच से छह महीने से दिल्ली सरकार तमाम दावे कर रही थी की व्यवस्था सुधरेगी। मगर अब नतीजा वही ढाक के तीन पात ही है। तमाम बड़ी बड़ी बातो और बड़े बड़े दावों के बाद हालत वही है। सरकारी स्कूल्ज के हालत जहा बद से बदतर हुए है वही प्राइवेट स्कूल्ज की मनमानिया और बड़ी ही है। शिक्षा का बजट डेढ़ गुना करने का कोई फायदा फिलहाल तो होता दिख ही नहीं रहा। शिक्षा का अधिकार किसी सरकार के अजेंडे मैं नहीं है और दिल्ली की सरकार इसका अपवाद नहीं। |
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Sunday, January 10, 2016
नर्सरी एडमिशन: फिर वही पुरानी कहानी
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