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Friday, March 1, 2019

An Unsatisfied Boss


Lion found that fox finished her work before everyone and reached home timely. He concluded fox was not performing well. Soon he found many lacunas in the work of a fox. He called a review meeting to analyse the efficiency of the fox. A mail was dropped immediately to the fox. She was called to the head office to present all of her efforts through a power point presentation. Fox did presentation confidently. Lion tried hard to find loopholes in her work, did deep scrutiny of her work but find nothing. He had to consider that the fox was performing well but he was not satisfied. Boss was unhappy. He still thought that Fox was more efficient but she had given less work. She had paid more for less work. So once again the lion called a review meeting. This time wolf, hyena and jackal were also called. These were the teammates of the fox. It was analyzed. jackal didn't give the 100% output but he worked for the entire day so he was appreciated and motivated for doing better. Wolf had many apologies for not doing up to the mark performance. Boss was not happy, so some new assignment was given to him. The hyena was overpowering and satirical by nature. he had some political connections. Even the lion was scared of him. So he was reviewed with few questions, which hyena ignored laughingly and his review was over. Then, it was the turn of review of fox again. Lion didn't see any file any presentation, just add new non-performing territories to her. Now the boss was happy. he made fox busy. But the fox was known for her smartness. She adjusted these territories nicely in her schedule. She finished her work timely as she did previously. The lion was unhappy but he knew to review fox again was not very beneficial. First, he gave advice then he ordered to fox to meet 10 clients daily. Lion took regular follow for this. He was disappointed because of fox performance. She was still performing. He added some more responsibilities to the fox. Finally, Fox began to become overburdened. She started to forget, sometimes she became late. Once again review meeting was called. This time boss found many loopholes in fox work. He warned fox to improve her performance and to leave casual attitude. Fox was overburdened and she continued to do mistakes. One day boss shook the hand with fox and shown the fox the way to outside the jungle. Still, the jackal was struggling to perform, still, the wolf had many apologies for performance and who dared to object hyena. Boss was satisfied except a problem, the team was not performing. For this, he needed a fox. MORAL OF THE STORY: You can be a good performer but it is more important to show yourself busy all the time.

Wednesday, February 27, 2019

The Ant and Grasshopper

The Ant did the hard work as it did as always and the grasshopper sang as he did as usual. The ant put its day and night to do the task which was given by the boss to her. The grasshopper always found a way to escape from the situation. The boss was not happy with the grasshopper. He always appreciated the ant. The ant always eager to complete the task but the grasshopper worked to prove his salary, The ant was sure that this time she would get the promotion. It was a promotion time. The boss increased the heat when he considered the grasshopper for the promotion. It disappointed the ant. She heard the old story in which the ant won in the end. The grasshopper preached the ant, "Only hard work is not the key to success. It is a boss perception which makes you successful." The ant refused to leave the habit of hard-working. The grasshopper refused to leave his habit of droning. The boss pleased the ant but sometimes pleased the grasshopper also. The grasshopper took the lead over the ant gradually. Then promotion happened it was not the grasshopper. All of you are thinking that finally, the ant won? You are wrong! The ant was also not the winner. The beetle won the race. He got the promotion. He was the employee of the company in which, the boss had worked before. He was close to the boss till the time. MORAL OF THE STORY: It doesn't matter whether you are an ant or a grasshopper. Whether you are a hard worker or a drone only those candidate get the promotion who are closer to the boss.

Monday, February 25, 2019

बॉस की सांत्वना

चीटी और टिड्डा दोनो ही नाराज़ थे। प्रोमोशन के नाम पर मिला धोखा बर्दाश्त नही कर पा रहे थे। उनका गुस्सा अपने इमीडियेट बॉस  कॉकरोच पर फट पड़ा।
कॉकरोच ने पूरी कोशिश की चीटी और टिड्डे को समझाने की पर दोनों ने ही बगावती तेवर अपना लिये थे। कॉकरोच ने अपने बॉस छिपकली को यह संदेश दिया। छिपकली ने सख्त रुख अपनाया और कहा कि यह मैनेजमेंट का फैसला है। मगर चीटी और टिड्डा ने यह फैसला मानने से इनकार कर दिया।
छिपकली को भी समझ आ गया कि मामला बिगड़ गया है। उसने अपने बॉस गिरगिट को यह जानकारी दी। गिरगिट ने मामले की गंभीरता को समझा और छिपकली को मीटिंग बुलाने के लिए कहा गया। छिपकली ने यह संदेश कॉकरोच को दिया।
मीटिंग मे गिरगिट ने पहला सवाल पूछा, "किसे दिक्कत है?"
टिड्डा कुछ बोलने के लिए खड़ा हुआ पर उसके बोलने से पहले ही सुपर बॉस गिरगिट बोला, ' अगर दिक्कत है तो इस्तीफा दो और जहा प्रोमोशन मिले वहाँ नौकरी कर लो।"
टिड्डे की बोलती बंद हो गयी। चीटी ने भी सोचा की रु. 30000 महीने की तो ईएमआई ही जाती है अगर नौकरी गयी तो खाने के लाले पड़ जाएंगे।
और इस तरह, हर तरह के विरोध ने उस मीटिंग मे दम तोड़ दिया।
MORAL OF THE STORY: बॉस का हर कदम सही ही होता है और अगर नही भी होता हो तो मान लेना चाहिए कि सही है। क्योंकि अगर एक महीने तनख्वाह नही आई तो ईएमआई कैसे जाएगी।

Monday, February 18, 2019

चीटी और टिड्डा

चींटी हमेशा की तरह मेहनत करती थी। और टिड्डा हमेशा मस्ती करता था। उन दिनों टिड्डे को तिलचट्टे का साथ भी मिल गया था।
चींटी हमेशा बॉस के दिये टास्क को जी जान से पूरा करने में जुट जाती जबकि टिड्डा हमेशा दिये हुए टास्क को दाये बाये कर देता।चीटी टिड्डे को समझाती तो टिड्डा चीटी की मजाक बना देता। ऐसे समय में तिलचट्टा भी टिड्डे की हां में हॉ मिलाता।
बॉस टिड्डे से नाखुश था और चीटी की तारीफ करता। चीटी को हमेशा लगता कि अब की बार तो पक्का प्रमोशन मिलेगा।
अब की बार मीटिंग जब हुई तो बॉस ने टिड्डे को भी प्रमोशन का दावेदार बता दिया। चीटी बहुत दुखी थी उसने तो पुरानी कहानी सुनी थी जिसमे चीटी और टिड्डे में से मेहनती चीटी जीत गयी थी।
टिड्डे ने फिर चीटी को समझाया कि काम करने से ज्यादा जरूरी काम करते दिखना है। इतनी मेहनत से कुछ हासिल नही होगा।
पर चीटी अपनी मेहनत से पीछे नही हटी  औऱ टिड्डा अपनी हरकतों से बाज़ नही आया और  बॉस कभी चीटी को फेवर करता तो कभी टिड्डे को।
मामला कुल मिला कर टिड्डे के फेवर में बनता जा रहा था। चीटी दुखी थी इतनी मेहनत के बाद भी उसकी काबिलियत पर प्रश्नचिन्ह था जबकि टिड्डा कम काम करके भी  उससे आगे था।
फिर प्रमोशन हुआ मगर टिड्डे का नही हुआ। तो फिर किसका हुआ?
आपको लग रहा होगा कि चीटी का हुआ? जी नही प्रमोशन गुबरेले का हुआ जो बॉस की पहली कंपनी में उसके साथ काम करता था।
Moral of the story:  आप चाहे चीटी हो या टिड्डा। आप चाहै दिन रात काम करे या निखट्टू बन के मलाई खाये। प्रमोशन हमेशा उसका होता है जो बॉस का प्रिय हो।

Monday, December 3, 2018

बॉस का चुटकुला

शेर की मीटिंग चल रही थी. उसका सबऑर्डिनेट तेंदुआ, तेंदुए का सबऑर्डिनेट चीता, और फ्रंट लाइन मैनेजर्स जैसे लोमडी सियार भेड़िया।हाइना मीटिंग में उपस्थित थे.
शेर का पूरा ध्यान अपने स्टाफ को कॉरपोरेट एटिकेट्स सिखाने पर था. बीच बीच में शेर भाषण को बोर होने से बचाने के लिए एकाध चुटकुला उसमे जोड़ देता था.
सब हंसते थे पर लोमड़ी उस चुटकुले का मतलब नोट कर लेती थी. लोमडी का ध्यान पूरी तरह शेर के भाषण पर था.
शेर ने यह बात नोट की लोमडी चुप बैठी है और हंस नही रही. उसे लगा कि लोमडी सीरियसली मीटिंग अटेंड नही कर रही है.
शेर चुटकुला सुनाता हुआ लोमडी के पास आया और अचानक पूछा कि क्या आप मीटिंग में है?
तेंदुए और चीते ने गुर्रा कर लोमड़ी को देखा. लोमडी घबरा गयी. उसने जो कुछ भी नॉट किया था वो शेर को दिखा दिया.
शेर कुछ सोच कर बोला अगर आप मीटिंग में है तो हंस क्यो नही रही है?
उसके बाद लोमडी शेर के हर चुट्कुले पर ठहाका मार मार कर हंसी. उसे लगा कि शायद शेर को अब शिकायत नही होगी.
मीटिंग खत्म होने के बाद नाराज़ तेंदुए ने लोमडी और उसके बॉस चीते को तलब किया. तेंदुआ बहुत गुस्से में था. उसने चीते को वार्निंग दी कि लोमडी को तमीज़ सिखाये इस तरह मीटिंग में हंसा जाता है क्या?

Moral of the story:
बॉस के चुटकुले पर हंसो या मत हंसो बैंड हमेशा जूनियर की बजती है

Sunday, December 2, 2018

बॉस का डिसकशन

टारगेट हो रहे थे और इन्वेंट्री अंडर कंट्रोल थी फिर भी शेर चिंतित था. उसे लग रहा था कि उसने अपने एम्प्लॉयीज को उसकी क्षमता से कम टारगेट दिया था.
उसे  चिंता थी कि अगले साल क्या टारगेट हो जो उसके एम्प्लॉइज की क्षमता के अनुकूल हो. उसने तुरंत एक  डिस्कशन मीटिंग बुलाई. उसने अपने सबऑर्डिनेट तेंदुए और उसके सबऑर्डिनेट चीते को आदेश दिया गया कि पूरे साल का सेल्स डेटा और इन्वेस्टमेंट की डिटेल एक्सेल शीट पर तैयार करे और अपने सुझाव तैयार करे कि कैसे सेल बढ़ेगी और उसके हिसाब से टारगेट दिए जायेंगे.
तेंदुए ने चीते के साथ मिल कर 20 पॉइंट्स तैयार किये. तय समय पर तेंदुआ और चीता डिस्कशन के लिए पहुच गए. मीटिंग शुरू हुई. लंच तक शेर कंपनी के विज़न के बारे मैं बताता रहा. लंच के बाद शेर ने कंपनी के टारगेट के बारे में बताना शुरू किया. तेंदुआ और चीता अलर्ट हो कर डिस्कशन कर लिए तैयार थे यद्यपि लंच में।किये भोजन से उन्हें हल्की से नींद आ रही थी. टी टाइम तक शेर उन्हें टारगेट और रेवेन्यू जनरेशन के बारे में बताता रहा.
टी टाइम के बाद शेर ने उन्है हिंट देना शुरू किया कि पॉसिबल टारगेट इस साल के टारगेट का दुगना हो सकता है. तेंदुआ और चीता ने इसका विरोध किया और डिस्कशन के लिए तैयार किया गया डेटा दिखाने की कोशिश की. इस पर शेर भड़क गया और तेंदुए, चीते की घिग्घी बंध गयी.
आखिरकार शेर ने उन पर तरस खाते हुए टारगेट इस साल के टारगेट का डेढ़ गुना कर दिया और डिस्कशन मीटिंग खत्म हो गयी. 
तेंदुए और चीते ने राहत की सांस ली कि आखिरकार वह टारगेट कम कराने में कामयाब रहे पर उन्हें चिंता थी कि वह डाउन द लाइन इसे कैसे बताए. बहुत सोच विचार कर उन्होंने एक डिस्कशन मीटिंग बुलाई. हर डाउन द लाइन एम्प्लाइज को मेल लिखी गयी कि अमुक तारीख को ठीक 10 बजे सेल्स डेटा और इन्वेस्टमेंट डिटेल के साथ निश्चित स्थान पर पहुचे क्योकि कुछ डिस्कशन होना है.
Moral of the story:
बॉस के साथ डिस्कशन का मतलब बॉस की तैयार स्पीच को सुनना, उसकी भाषा का मतलब समझना और उसके दिए टारगेट को बिना बहस एक्सेप्ट करना होता है

Friday, November 30, 2018

असन्तुष्ट बॉस

शेर ने देखा लोमड़ी अपना काम सबसे जल्दी खत्म कर घर पहुच जाती है. तो शेर को यकीन हो गया कि लोमड़ी अपना काम मन लगा कर नही कर रही है. उसने लोमडी की review meeting बुलाई. लोमड़ी को आदेश दिया गया कि सारा डेटा एक पॉवरपॉइंट प्रेजेंटेशन के द्वारा शेर के सामने प्रस्तुत किया जाए.
शेर ने हर फ़ाइल को खंगाला लेकिन लोमडी के काम में कोई कमी नही दिखाई दी. तो शेर को मानना पड़ा कि लोमडी ठीक काम कर रही है. पर उसे संतुष्टि नही हुई.
उसे लग रहा था कि लोमडी को उसकी योग्यता से कम काम दिया गया है और वेतन उसे ज्यादा मिल रहा है.
आखिरकार एक बार फिर review meeting बुलाई गई इस बार उसमे भेड़िया सियार और हाइना भी बुलाये गये. यानी पूरा स्टाफ बुलाया गया तो पाया गया कि सियार के हिस्से में जो काम है वह उसमे100%  output नही आ रहा है पर सियार सुबह से लेकर शाम तक मेहनत करता था अतः उसको और अच्छा काम करने के लिए मोटिवेट किया गया.
भेड़िया के रिव्यु  हुआ तो भेड़िया ने हाँ हॉ ना ना में अपना रिव्यु टाइम निकाल दिया. शेर को गुस्सा आया तो उसने भेडियो को ज्यादा आउटपुट निकलने का टारगेट दिया.
हाइना जो था वह मजबूत बैकग्राउंड से था मुंहफट भी था और दबंग भी था. शेर उससे थोड़ा घबराता भी था.
तो शेर ने कुछ एवें सवाल पूछे जिसे हाइना ने हंस कर दाये बाये कर दिया. और उसका रिव्यु खत्म हो गया.
अब फिर लोमडी की बारी आई. शेर को अब भी लग रहा था कि लोमडी का वेतन ज्यादा है तो काम भी ज्यादा होना चाहिए. तो उसने एक टेरिट्री लोमडी को और दे दी आउटपुट निकालने को.
अब शेर संतुष्ट था कि लोमडी बिजी है. पर कुछ दिन बाद उसने देखा कि लोमडी ने अपने समय में उस टेरेटरी को भी एडजस्ट कर लिया है और पहले की तरह अब भी वह घर जल्दी पहुंच जाती है. शेर फिर असन्तुष्ट हो गया रिव्यु का कोई फायदा नही था तो उसने पहले एक सलाह के तौर पर और फिर आदेश के रूप में लोमडी के लिए यह अनिवार्य कर दिया कि वह दस नए क्लाइंट से रोज़ मिले.
शेर अब बेचैन था कि लोमडी उसके आदेश का पालन नही कर रही है. एक पर्सनल मीटिंग में इस बात को लेकर शेर ने लोमडी से इस बारे में जानकारी चाही तो लोमडी ने उसे आश्वस्त करते हुए कहा कि काम हो रहा है. पर शेर को यकीन नही हुआ.
एक बार फिर रिव्यु हुआ और लोमडी को थोड़ा काम और दिया गया. अब लोमडी पर काम का बोझ बाद गया था. वह कई बार काम भूल जाती.  कई बार लेट हो जाती.
अब शेर को लगने लगा कि लोमड़ी काम को कैसुअली ले रही है. उसे लोमडी के ड्रेस सेंस पर खीझ आने लगी. अक्सर उसकी बहस लोमडी से हो जाती.
आखिरकार शेर ने एक दिन लोमडी को जंगल छोड़ने का आदेश दे दिया.
सियार अब भी दिन भर मेहनत करता था पर आउटपुट 100% नही आता था, भेड़िया अब भी चिक चिक झिक झिक कर  काम चला रहा था और हाइना से कुछ कहने की हिम्मत तो पहले भी किसी में नही थी.
पर शेर संतुष्ट था. उसे एक नई लोमडी की तलाश थी जो पुरानी लोमडी की जगह ले सके

Moral of the story
कॉरपोरेट वर्ल्ड में जितना काम आ करते हो उससे ज्यादा करते हुए दिखना चाहिए वरना किसी दिन आपको भी बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है.

The power of timely action

The difference between success and failure is marginal. Sometimes, a person who is talented, efficient, confident, and equipped with knowled...