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Friday, April 5, 2019
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Tuesday, March 12, 2019
The Boss's joke
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An Unsatisfied Boss
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The Ant and Grasshopper
Monday, February 25, 2019
बॉस की सांत्वना
चीटी और टिड्डा दोनो ही नाराज़ थे। प्रोमोशन के नाम पर मिला धोखा बर्दाश्त नही कर पा रहे थे। उनका गुस्सा अपने इमीडियेट बॉस कॉकरोच पर फट पड़ा।
कॉकरोच ने पूरी कोशिश की चीटी और टिड्डे को समझाने की पर दोनों ने ही बगावती तेवर अपना लिये थे। कॉकरोच ने अपने बॉस छिपकली को यह संदेश दिया। छिपकली ने सख्त रुख अपनाया और कहा कि यह मैनेजमेंट का फैसला है। मगर चीटी और टिड्डा ने यह फैसला मानने से इनकार कर दिया।
छिपकली को भी समझ आ गया कि मामला बिगड़ गया है। उसने अपने बॉस गिरगिट को यह जानकारी दी। गिरगिट ने मामले की गंभीरता को समझा और छिपकली को मीटिंग बुलाने के लिए कहा गया। छिपकली ने यह संदेश कॉकरोच को दिया।
मीटिंग मे गिरगिट ने पहला सवाल पूछा, "किसे दिक्कत है?"
टिड्डा कुछ बोलने के लिए खड़ा हुआ पर उसके बोलने से पहले ही सुपर बॉस गिरगिट बोला, ' अगर दिक्कत है तो इस्तीफा दो और जहा प्रोमोशन मिले वहाँ नौकरी कर लो।"
टिड्डे की बोलती बंद हो गयी। चीटी ने भी सोचा की रु. 30000 महीने की तो ईएमआई ही जाती है अगर नौकरी गयी तो खाने के लाले पड़ जाएंगे।
और इस तरह, हर तरह के विरोध ने उस मीटिंग मे दम तोड़ दिया।
MORAL OF THE STORY: बॉस का हर कदम सही ही होता है और अगर नही भी होता हो तो मान लेना चाहिए कि सही है। क्योंकि अगर एक महीने तनख्वाह नही आई तो ईएमआई कैसे जाएगी।
Monday, February 18, 2019
चीटी और टिड्डा
चींटी हमेशा बॉस के दिये टास्क को जी जान से पूरा करने में जुट जाती जबकि टिड्डा हमेशा दिये हुए टास्क को दाये बाये कर देता।चीटी टिड्डे को समझाती तो टिड्डा चीटी की मजाक बना देता। ऐसे समय में तिलचट्टा भी टिड्डे की हां में हॉ मिलाता।
बॉस टिड्डे से नाखुश था और चीटी की तारीफ करता। चीटी को हमेशा लगता कि अब की बार तो पक्का प्रमोशन मिलेगा।
अब की बार मीटिंग जब हुई तो बॉस ने टिड्डे को भी प्रमोशन का दावेदार बता दिया। चीटी बहुत दुखी थी उसने तो पुरानी कहानी सुनी थी जिसमे चीटी और टिड्डे में से मेहनती चीटी जीत गयी थी।
टिड्डे ने फिर चीटी को समझाया कि काम करने से ज्यादा जरूरी काम करते दिखना है। इतनी मेहनत से कुछ हासिल नही होगा।
पर चीटी अपनी मेहनत से पीछे नही हटी औऱ टिड्डा अपनी हरकतों से बाज़ नही आया और बॉस कभी चीटी को फेवर करता तो कभी टिड्डे को।
मामला कुल मिला कर टिड्डे के फेवर में बनता जा रहा था। चीटी दुखी थी इतनी मेहनत के बाद भी उसकी काबिलियत पर प्रश्नचिन्ह था जबकि टिड्डा कम काम करके भी उससे आगे था।
फिर प्रमोशन हुआ मगर टिड्डे का नही हुआ। तो फिर किसका हुआ?
आपको लग रहा होगा कि चीटी का हुआ? जी नही प्रमोशन गुबरेले का हुआ जो बॉस की पहली कंपनी में उसके साथ काम करता था।
Moral of the story: आप चाहे चीटी हो या टिड्डा। आप चाहै दिन रात काम करे या निखट्टू बन के मलाई खाये। प्रमोशन हमेशा उसका होता है जो बॉस का प्रिय हो।
The power of timely action
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